‘रावण’ के बाद अब ‘रामायण’ के एक और फेमस कैरेक्टर का हुआ निधन

by sadmin
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हाल ही में टीवी के फेमस धार्मिक शो ‘रामायण’ के रावण यानी अरव‍िंद त्रिवेदी ने इस दुनिया को अलविदा कहा। उनके निधन से पूरे हर कोई दुखी था। अभी फैंस अरव‍िंद त्रिवेदी के निधन के दुख से उबर भी नहीं पाए कि ‘रामायण’ के एक और फेमस कैरेटर ने इस दुनिया को अलविद कह दिया है। जी हां, ‘रामायण’ में भगवान राम के बचपन के मित्र निषाद राज का किरदार निभाने वाले एक्टर चंद्रकांत पंड्या अब इस दुनिया में नहीं रहे। चंद्रकांत के निधन की खबर ‘रामायण’ की सीता यानी दीपिका चिखलिया ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए फैंस को दी है। इस खबर हर किसी को हिला कर रख दिया है।

दीपिका चिखलिया ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर ‘निषाद राज’ यानी चंद्रकांत पंड्या की तस्वीर शेयर करते हुए लिए उनके निधन के बारे में बताया। इस खबस से फैंस ही नहीं बल्कि रामायण का हर कैरेक्टर बेहद दुखी है। आपको बता दें कि चंद्रकांत पंड्या को लोग प्यार से ‘बबला’ नाम से भी बुलाते थे। चंद्रकांत का जन्म 1 जनवारी, 1946 को गुजरात राज्य के बनासकांठा जिला के भीलडी गांव में हुआ था। उनके पिता एक बिजनसमैन थे और बाद में वह गुजरात से आकर मुंबई में ही बस गए थे। वहीं चंद्रकांत का बचपन मुंबई में ही बीता और शिक्षा भी यही से पूरी हुई।

चंद्रकांत पंड्या ने ‘रामायण’ के अलावा कई फिल्मों और टीवी शोज में भी काम किया है। वहीं चंद्रकांत बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अमज़द खान के परम मित्र थे। दोनों ने कॉलेज की पढ़ाई एक साथ पूरी की। चंद्रकांत को बचपन से ही नाटकों और एक्टिंग में काफी रुचि थी। इसी के चलते वह नाटकों में हिस्सा लेने लगे थे। इसी दौरान एक्टर उपेंद्र त्रिवेदी और अरविंद त्रिवेदी के साथ नाटकों में काम करने का मौका मिला। यहाँ से इन्होंने अभिनय करना शुरू किया। वहीं उन्हें पहला ब्रेक मिला गुजरती फिल्म फिल्म ‘कडू मकरानी’ में। इस फिल्म में काम करने के बाद चंद्रकांत गुजराती फिल्म इंडस्ट्री के नामी अभिनेता बन गए। लेकिन रामायण में इनके ‘निषाद राज’ के किरदार को कोई नहीं भूल नहीं सकता।

आपको बता दें कि ‘रामायण’ सहित चंद्रकांत पंड्या ने करीब 100 से अधिक हिंदी और गुजराती फिल्में और धारावाहिकों में काम किया है। इस टीवी शोज में ‘विक्रम बेताल’, ‘सम्पूर्ण महाभारत’, ‘होते होते प्यार हो गया’, ‘तेजा’, ‘माहियार की चुंडी’, ‘सेठ जगदंशा’, ‘भादर तारा वहता पानी’, ‘सोनबाई की चुंडी’ और ‘पाटली परमार’ शामिल है।

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