मरते दम तक लड़ती रहूंगी साम्प्रदायिक ताकतों से – ममता बनर्जी

by sadmin
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कोलकाता ।  ममता बनर्जी रेड रोड पर ईद-उल-फ़ितर की नमाज में शामिल हुईं। उन्होंने सभी लोगों से भयभीत न होने और बेहतर भविष्य के लिए एकजुट होने का अनुरोध किया है।मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि वे साम्प्रदायिक ताकतों से लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा डिवाइड एंड रूल (फूट डालो और राज करो) और अलग-थलग करने की नीति चल रही है, जिसने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं जो देश के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर इस स्थिति से निपटने का आह्वान किया। मंगलवार को ईद पर 14 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ के बीच ममता ने कहा कि भारत में चल रही अलगाव की राजनीति सही नहीं है।

सीएम ममता ने कहा, मुझे खुशी है कि दो साल के अंतराल के बाद आप रेड रोड पर इस ऐतिहासिक ईद की नमाज के लिए इकट्ठा हुए हैं। लेकिन ऐसा कहीं नहीं होता। देश में हालात सही नहीं है। फूट डालो और राज करो की नीति तथा देश में चल रही अलगाव की राजनीति सही नहीं है। भयभीत न हों और लड़ाई जारी रखें। उन्होंने कहा, न तो मैं, न ही मेरी पार्टी और न ही मेरी सरकार ऐसा कुछ करेगी जिससे आप दुखी हों। उन्होंने कहा, ईर्ष्या करने वाले लोग हैं जो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए झूठ बोलते रहते हैं। डरो मत और लड़ाई जारी रखो।’

मुख्यमंत्री ने कहा, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान, उन्होंने  विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट होने की अपील की,  जो देश को बांटना और लोगों पर अत्याचार करना चाहती है। ममता बोलीं, हम मिलकर इसे देश से हटा देंगे।’ उन्होंने कहा, ‘मैं आज वादा करती हूं कि जब तक मैं जीवित हूं मैं लोगों के लिए लड़ूंगी चाहे वे मुस्लिम हों या हिंदू या सिख या जैन। मुझे लड़ने की ताकत आपसे मिलती है।’

बीजेपी पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा, ‘वो बंगाल में लोगों के बीच एकता के कारण ईर्ष्या करते हैं और इसलिए वे मुझे गाली देते हैं। वे मुझे अपमानित करते रहते हैं लेकिन मैं डरती नहीं हूं। मुझे पता है कि कैसे लड़ना है।’ उन्होंने कहा, ‘आपके अच्छे दिन भी आएंगे। मुझे ‘झूठे अच्छे दिन’ नहीं चाहिए, मैं देश में एकता चाहती हूं। मुझे ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ चाहिए।’ उर्दू में अपनी छह किताबों का जिक्र करते हुए टीएमसी प्रमुख ने कहा कि वह मुस्लिम समुदाय के त्योहारों की बारीकियां जानती हैं और उन्हें दूसरे धर्मों के रीति-रिवाजों की भी जानकारी है।

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