यशपाल आर्य का इस्तीफा BJP के लिए उत्तराखंड में बड़ा झटका

by sadmin
Spread the love

उत्तराखंड के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे संजीव आर्य का बीजेपी से कांग्रेस में जाना भगवा पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। विधानसभा चुनावों में बस कुछ ही महीने बचे हैं, भाजपा के पास अनुसूचित जाति के एक दिग्गज नेता आर्य के लिए एक विकल्प खोजने के लिए बहुत कम समय है। आर्य से उम्मीद की जा रही थी कि वह बीजेपी को अपने एससी आउटरीच में मदद करेंगे। खासकर कुमाऊं के तराई इलाके में।

हाल ही में कांग्रेस विधायक और दो निर्दलीय उम्मीदवारों को पार्टी में शामिल किए जाने के बाद आर्य के बाहर निकलने से कांग्रेस पर भाजपा के मनोवैज्ञानिक लाभ पर भी असर पड़ा है। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले आर्य खुद कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए थे। उनके पार्टी छोड़नेसे उधम सिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में भाजपा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें नौ विधानसभा सीटें हैं। जिले की एक सीट खटीमा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सीट है।

भाजपा नेताओं के एक वर्ग का मानना ​​है कि आर्य कांग्रेस में लौट आए क्योंकि उनकी बाजपुर सीट जिले में किसानों के आंदोलन का केंद्र है और वह भाजपा उम्मीदवार के रूप में हार जाते। हालांकि, आर्य के इस्तीफे से बीजेपी के लिए 2017 में बीजेपी में शामिल हुए अन्य पूर्व कांग्रेस नेताओं पर लगाम लगाना मुश्किल हो सकता है।

आर्य को पड़ोसी नैनीताल जिले में भी लोकप्रियता हासिल है। उनके बेटे संजीव आर्य विधानसभा में नैनीताल का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा के एक कार्यकर्ता ने कहा, “भाजपा के लिए नैनीताल में संजीव के खिलाफ संभावित उम्मीदवार का चुनाव करना मुश्किल काम हो सकता है। संजीव इस निर्वाचन क्षेत्र में लोकप्रिय हैं।”

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने आर्य को दलबदल करने से रोकने की कोशिश की। पार्टी को एक एससी नेता के रूप में उनके कद का एकहसास था। सीएम धामी खुद हाल ही में आर्या को बीजेपी में बने रहने के लिए मनाने के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग के लिए उनके आवास पर गए थे। कांग्रेस भी आर्य को पार्टी में वापस लाने के लिए उत्सुक थी। उनके लौटने के बाद सोमवार को कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय देहरादून में जश्न का माहौल रहा।

Related Articles

Leave a Comment