2007 में हुआ था धूमकेतू में विस्फोट, अवशेष अब पहुचेंगे धरती तक

by sadmin
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लंदन । क्षुद्रग्रह धूमकेतु प्रायः 70 से लेकर सौ से ज्यादा सालों में एक बार सूर्य के पास आते हैं। इनकी कक्षा बहुत ही लंबी होती है। आज से 23 साल पहले 17पी/होमलेस नाम के धूमकेतु को पहली बार हबल ने देखा था। लेकिन साल 2007 में इसमें भारी विस्फोट हो गया। अब उसके धूल के कण उसी की कक्षा से होते हुए पृथ्वी के पास आ रहे हैं। जब यह विस्फोट हुआ था तब 17पी/होमलेस कुछ देर के लिए सौरमंडल का सबसे बड़ा पिंड बन गया था।
इतना ही नहीं इसकी चमक भी लाखों गुना बढ़ गई थी। उसके बाद से उसकी धूल, गैस और राख सौरमंडल के अंदरूनी हिस्से तक आ गई हैं। और इसी साल यह धरती के आसमान से भी दिखाई देगा। शोधकर्ताओं ने बताया है कि इस विस्फोट के बाद धूल की लकीर पैदा हो गई थी। उन्होंने शोधपत्र में बताया है कि धूल की लकीर के दो चक्करों तक उसे धरती के टेलीस्कोप से 2022 में ही देखा जा सकेगा। फिनलैंड के फिनीश जियोस्पियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं की अगुआई में टीम ने गणना कर पता लगाया कि धूल के कणों की यह लकीर पृथ्वी से कब और कहां दिखाई देगी। इस अध्ययन की वरिष्ठ शोधकर्ता मारिया ग्रिट्सेविच ने बताया कि विस्फोट के दौरान इस धूमकेतु के कोमा से भारी मात्रा में धूल के कण निकले थे और सूर्य के साथ इसकी अपनी कक्षा में ही फैल गए थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे वैज्ञानिकों को एक बहुत ही अनोखा मौका मिला है जिसमें वे धूमकेतु के पदार्थों का अध्ययन कर सकते हैं। इसके लिए टीम ने भी एक प्रतिमान विकसित किया है जिससे धूमकेतु के धूल की लकीर के विकास की वास्तविक रूप से व्याख्या की जा सके।
माना जाता है कि धूमकेतु में सौरमंडल के शुरुआती दौर के पदार्थ होते हैं। शोधकर्ताओं ने पूर्वानुमान लगाया है कि धूमकेतु के विस्फोट से बनी धूल की लकीर जुलाई 2022 से शुरू होकर अगस्त 2022 में धरती के ही ठीकठाक टेलीस्कोप से भी देखी जा सकेगी। गैर पेशेवर खगोलविद भी इस धूल की पूंछ का अवलोकन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कम से कम 30 सेंटीमीटर वाले सीसीडी कैमरे से सुसज्जित टेलीस्कोप से इमेज सबट्रैक्शन पद्धति क का उपयोग करना होगा। टीम ने पहले ही इस धूल की लकीर का अवलोकन कर लिया है। इस शोधपत्र मं विस्तार से धूमकेतु से कणों की लकीर बनने का कालक्रम बताया गया है।  अवलोकनों से खुलासा हुआ है कि कणों के बादलों ने एक रेत की घड़ी का पैटर्न बनाया है जो अंतरिक्ष में विशेष बिंदुओं पर मिलते हैं। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में  17पी/होमलेस धूमकेतु के विस्फोट की घटना और उसके बाद से बने धूल की की लकीर के कणों के रास्ते का सटीक प्रतिमान बनाया है।
यह पहली बार है जब इस तरह से दो प्रतिमानों को मिला कर एक उच्च सटीकता वाले नतीजे देने वाला प्रतिमान बनाया गया। पहली बार 1999 में इस धूमकेतु को देखने के बाद इसके विस्फोट को साल 2007 मे हबल टेलीस्कोप ने ही देखा था। उस समय यह पृथ्वी से 14.9 करोड़ किलोमीटर दूर था। मालूम हो कि पृथ्वी के पास के गुजरने वाले पिंडों में क्षुद्रग्रह और उल्काओं का नाम सबसे प्रमुख होता है। लेकिन कई बार धूमकेतु भी पृथ्वी के पास से गुजरते हैं और उसका असर हमारे सौरमंडल में भी देखने को मिलता है।

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