हरेली तिहार के साथ ही होगा छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आगाज़

by sadmin
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दुर्ग। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छग सांस्कृतिक धरोहर को सहेजकर रखने हरेली पर अवकाश घोषित किया गया है। छत्तीसगढ़ी संस्कृति में वर्ष के प्रथम त्यौहार के रूप में हरेली का बहुत महत्व है। इस अवसर पर प्रदेश के लोगों द्वारा गेड़ी की पूजा की जाती है एवं गेड़ी नृत्य किया जाता है जिसमें बड़ो के साथ – साथ बच्चे भी हिस्सा लेते हैं । गेड़ी के इस महत्व एवं मांग को देखते हुए बसोड़ों द्वारा इस त्यौहार पर बड़ी मात्रा में इसका निर्माण कर विक्रय किया जाता है। इन बसोड़ों को बांस वन विभाग द्वारा डिपो के माध्यम से प्रदाय किया जाता है। हरेली के पहले वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अरुण वोरा ने सी मार्ट से गेड़ी खरीदा एवं ओलंपिक को लेकर कहा कि हैं तैयार हम। विधायक वोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के परंपरागत तीज-त्यौहार, बोली-भाखा, खान-पान, ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने लोगों तक गेड़ी की उपलब्धता के लिए जिला मुख्यालयों में स्थित सी-मार्ट में किफायती दर में गेड़ी बिक्री के लिए व्यवस्था की है।पिछले वर्ष शुरू की गई छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को काफी लोकप्रियता मिली। इसको देखते हुए इस बार हरेली तिहार के दिन शुरू होने वाली छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 2023-24 को और भी रोमांचक बनाने के लिए एकल श्रेणी में दो नए खेल रस्सीकूद एवं कुश्ती को भी शामिल किया गया है। हरेली पर्व के दिन से ही प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल की शुरूआत भी होने जा रही है, जो सितंबर के अंतिम सप्ताह तक जारी रहेगा। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।

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