मशहूर शायर के 10 चुनिंदा आज के शेर, आइए पढ़ कर उठाते हैं आनंद

by sadmin
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जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ

जाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं

अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को
मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ को 

हंसो और हँसते हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में

हमीं पे रात भारी है सितारो तुम तो सो जाओ

थक गया मैं करते करते याद तुझ को
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ 

बिखरा पड़ा है तेरे ही घर में तिरा वजूद

बेकार महफ़िलों में तुझे ढूँढ़ता हूँ मैं 

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में
ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे 

किस को ख़बर थी साँवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैं

सावन आया लेकिन अपनी क़िस्मत में बरसात नहीं

बढ़ा के प्यास मिरी उस ने हाथ छोड़ दिया
वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल-लगी की तरह 

मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साए को

बदन मिरा ही सही दोपहर न भाए मुझे 

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी
वगर्ना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते

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