चीन का सैन्य अभ्यास क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा : किशिदा

by sadmin
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टोक्यो । ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच खिंची तलवार के बीच जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने शुक्रवार को कहा कि ताइवान की ओर लक्षित चीन का सैन्य अभ्यास एक ‘गंभीर समस्या’ है, जिससे क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा को खतरा है। दरअसल, अभ्यास के तौर पर चीन द्वारा दागी गयी पांच बैलिस्टिक मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में गिरीं। किशिदा ने अमेरिकी संसद की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी और कांग्रेस के उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ सुबह के नाश्ते के बाद कहा कि मिसाइल प्रक्षेपणों को ‘तुरंत रोके’ जाने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि ताइवान पर अपना दावा जताने वाले चीन ने पेलोसी की यात्रा को उकसावा बताया था और गुरुवार को ताइवान के आसपास के छह क्षेत्रों में मिसाइल दागने समेत सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया था। उसने धमकी दे रखी है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ताइवान पर बलपूर्वक कब्जा जमा लेगा। पेलोसी ने बुधवार को ताइपे में कहा था कि स्व-शासित द्वीप तथा दुनिया में कहीं भी लोकतंत्र के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता ‘अटल’ है। जापान के रक्षा मंत्री नुबुओ किशी ने कहा कि जापान के मुख्य द्वीप के सुदूर दक्षिण में स्थित हातेरुमा में गुरुवार को पांच मिसाइलें गिरीं। उन्होंने कहा कि जापान ने यह कहते हुए चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराया है कि मिसाइलों से जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा और जापानी लोगों की जिंदगियों को खतरा है, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।  जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने कहा कि चीन के कदम ‘क्षेत्र तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शांति एवं स्थिरता को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं तथा हम सैन्य अभ्यास को तत्काल रोके जाने की मांग करते हैं।’ हयाशी कंबोडिया में एक क्षेत्रीय बैठक में भाग ले रहे हैं। किशिदा ने कहा कि शुक्रवार को सुबह के नाश्ते पर पेलोसी और कांग्रेस के उनके प्रतिनिधिमंडल ने चीन, उत्तर कोरिया और रूस को लेकर अपनी साझा सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा की तथा ताइवान में शांति एवं स्थिरता के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जतायी। पेलोसी का जापान के अपने समकक्ष निचले सदन के अध्यक्ष हिरोयुकी होसोदा से भी बातचीत करने का कार्यक्रम है। जापान और उसका मुख्य सहयोगी अमेरिका चीन के बढ़ते दबदबे से निपटने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूरोप में अन्य लोकतंत्रों के साथ नई सुरक्षा और आर्थिक रूपरेखाओं पर जोर देता रहा है।

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