ईरान, अमेरिका और यूरोपीय संघ अपने दूतों को ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर बात करने वियना भेजेगा

by sadmin
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तेहरान । ईरान, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) ने कहा कि वे ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए अपने दूत वियना भेजेगा। यह कदम वर्ष 2015 में ईरान और विश्व शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते को बचाने की आखिरी कोशिश प्रतीत हो रही है। हालांकि, तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका है कि ऐतिहासिक समझौते में शामिल अन्य पक्षकार भी अचानक हो रहे सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं या नहीं। यह भी जानकारी नहीं मिली है कि दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हो रही परोक्ष वार्ता में कोई प्रगति हुई है या नहीं। वार्ता की अध्यक्षता करने वाले यूरोपीय संघ के अधिकारी एनरिक मोरा ने कहा कि बातचीत के केंद्र में हाल में समझौते को बहाल करने के लिए तैयार मसौदा रहेगा। वहीं, ईरान ने कहा कि वह अपने परमाणु वार्ताकार अली बाघेरी कानी को ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना भेज रहा है। ईरान के लिए नियुक्त अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रॉब मैली ने भी ट्वीट किया कि वह भी वार्ता के लिए वियना जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि वार्ता से पहले अमेरिका की ‘‘उम्मीदें सीमित हैं। मैली ने कहा, ‘‘अमेरिका ईयू की कोशिशों का स्वागत करता है और समझौते के लिए अच्छी भावना से कार्य करने के लिए तैयार है। जल्द ही पता चल जाएगा कि ईरान क्या ऐसी ही भावना के साथ तैयार है।’’ उल्लेखनीय है कि समझौते को बहाल करने की कोशिश कुछ समय पहले तब खटाई में पड़ गई जब विभिन्न पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहे। ईरान ने मांग की कि अमेरिका गारंटी दे कि वह समझौते से फिर बाहर नहीं होगा और उसके अर्धसैनिक बल रिवल्यूशनरी गार्ड पर आतंकवाद को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों को हटा लेगा। अचानक वियना में वार्ता की घोषणा ईयू के विदेश मामलों के प्रमुख जोसेफ बोरेल द्वारा गत हफ्तों में गतिरोध को दूर करने की लगातार की जा रही कोशिशों का नतीजा माना जा रहा है। उन्होंने हाल में कहा था कि, अतिरिक्त अहम सुलह के लिए संभावनाएं क्षीण हो रही हैं।’’अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंव ने वर्ष 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग करने की घोषणा की थी। इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक के एवज में उसके खिलाफ लगे कई प्रतिबंधों को हटा लिया गया था। परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका के समझौते से अलग होने के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर परमाणु गतिविधियों को शुरू किया और उसके पास एक परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त उच्च परिष्कृत यूरेनियम है।

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