भारत Vs न्यूजीलैंड का आज सबसे बड़ा टेस्ट: विश्व चैंपियन बनने के लिए क्या करेंगे विराट?

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लेखकः मनोज चतुर्वेदी
विराट कोहली भारत के सबसे कामयाब टेस्ट कप्तान हैं। उनके नेतृत्व में देश ने सबसे ज्यादा 36 टेस्ट मैच जीते हैं। कोहली जिस रफ्तार से कामयाबी हासिल कर रहे हैं, उससे एक दिन वह दुनिया के सबसे सफल टेस्ट कप्तान भी बन सकते हैं। लेकिन किसी कप्तान के कद को आईसीसी चैंपियनशिपों में कामयाबी से भी नापा जाता है। यह कामयाबी अभी तक कोहली के हाथ नहीं लगी है। दो साल पहले 2019 के आईसीसी विश्वकप में वह इसी इरादे से गए थे, लेकिन न्यूजीलैंड के हाथों सेमीफाइनल हार गए। इसलिए वह सपना साकार नहीं हो सका। अब एक बार फिर वह इंग्लैंड में ऐसी कामयाबी पाने पहुंचे हैं। इस बार उनका इरादा टेस्ट क्रिकेट का पहला विश्व चैंपियन बनने का है। इसके लिए उनका साउथेंपटन के ऐजस बाउल मैदान पर न्यूजीलैंड से ही मुकाबला होना है। आज 18 जून से यह मुकाबला शुरू हो रहा है और 22 जुलाई तक दुनिया को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का विजेता मिल जाएगा।

किसमें कितना है दम
भले ही भारत टेस्ट क्रिकेट का विश्व चैंपियन बनने के करीब पहुंच गया है, लेकिन क्रिकेट के इस प्रारूप को यहां तक पहुंचने में एक दशक से ज्यादा इंतजार करना पड़ा है। क्रिकेट में वनडे फॉर्मेट के विश्व कप के बाद टी-20 विश्व कप की सफलता से प्रेरित होकर टेस्ट क्रिकेट की विश्व चैंपियनशिप आयोजित करने का विचार आईसीसी के जेहन में पहली बार 2009 में आया। यह न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान मार्टिन क्रो के दिमाग की उपज था। आईसीसी ने दुबई में सितंबर 2010 में हुई मुख्य कार्यकारी समिति की बैठक में इसके आयोजन को मंजूरी भी दे दी। फिर भी इसे शुरू करने में नौ साल लग गए।

अब सवाल यह है कि भारत और न्यूजीलैंड में से किस टीम के चैंपियन बनने की बेहतर संभावनाएं हैं। इस मामले में क्रिकेट विशेषज्ञ बंटे हुए हैं। एक वर्ग ऐसा है जिसे लगता है, इंग्लैंड की कंडिशन और ड्यूक गेंदों का इस्तेमाल होने से न्यूजीलैंड के पेस अटैक को फायदा मिल सकता है। दूसरे वर्ग के मुताबिक, भारतीय पेस अटैक भी जानदार है। उसके पास रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा जैसे दिग्गज स्पिनर हैं, जो पलड़े को भारत के पक्ष में झुका सकते हैं। यह जरूर है कि न्यूजीलैंड टीम ने इस मुकाबले से पहले इंग्लैंड के साथ दो टेस्ट खेले हैं। इसलिए उसकी तैयारी कहीं अच्छी है। वहीं भारतीय टीम देर से पहुंचने के कारण क्वारंटीन पीरियड के बाद करीब दो हफ्ते अभ्यास करने की स्थिति में रही।

साउथेंपटन के ऐजस बाउल में आमतौर पर विकेट तेज गेंदबाजों के लिए मददगार रही है क्योंकि उन्हें स्विंग मिलने के साथ गेंद मूव करती है। इसके अलावा विकेट में तेज उछाल भी है। इससे बल्लेबाजों की कठिन परीक्षा होती रही है। पेस गेंदबाजी के मामले में भारत के पास जसप्रीत बुमराह, ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाज हैं, जो किसी भी बल्लेबाजी को झकझोरने का दमखम रखते हैं। यह सही है कि न्यूजीलैंड के पास भी टिम साउदी, ट्रेंट बोल्ट, जेमिसन जैसे गेंदबाज हैं, लेकिन भारतीय अटैक को किसी भी मामले में कमतर नहीं माना जा सकता। इंग्लैंड के स्पिनर मोंटी पनेसर और भारतीय दिग्गज मनिंदर सिंह दोनों को ही लगता है कि अश्विन और रविंद्र जडेजा की जोड़ी भारत के लिए कारगर साबित हो सकती है।

यह सही है कि भारत ने 2014 के बाद से किसी भी इंग्लैंड दौरे पर इन दोनों को एक साथ टेस्ट में नहीं खिलाया है और दोनों का इंग्लैंड में कोई बहुत अच्छा रेकॉर्ड भी नहीं है। उन्होंने क्रमश: 14 और 16 विकेट निकाले हैं। लेकिन अब एक स्पिनर को बिठाकर एक बल्लेबाज की जगह निकालने की बात में कोई दम नजर नहीं आता। इसकी वजह यह है कि जडेजा को किसी भी बल्लेबाज से कम करके नहीं देखा जा सकता। पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी बल्लेबाजी को कौन भुला सकता है। वैसे भी वह 51 टेस्ट में 36.18 के औसत से 1958 रन बना चुके हैं। दूसरी तरफ अश्विन भी जरूरत के हिसाब से बल्लेबाजी करने में माहिर हैं। उनके नाम पांच शतक हैं। इसलिए इस जोड़ी को खिलाने से बल्लेबाजी में कमजोरी नहीं आएगी। पनेसर कहते हैं कि साउथेंपटन में आमतौर पर मौसम गर्म रहता है और इस स्थिति में दो स्पिनर खिलाना सहायक साबित हो सकता है। मनिंदर को भी लगता है कि दोनों स्पिनरों में अब बहुत सुधार हो चुका है और अश्विन तो अब किसी भी ट्रैक पर विकेट लेने की महारत रखते हैं। फिर स्पिन के मामले में न्यूजीलैंड की स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। उसने सेंटनर की जगह एजाज पटेल पर भरोसा किया है।

दोनों टीमों की बल्लेबाजी की धुरी कप्तान विराट कोहली और केन विलियम्सन हैं। यह सही है कि विलियम्सन को इस मुकाबले से पहले इंग्लैंड में खेलने का अनुभव मिल गया है, लेकिन उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में ऐसा कुछ नहीं किया है, जिसे लेकर भारतीय खेमा चिंतित हो। जहां तक विराट कोहली की बात है तो उनकी बल्लेबाजी की दुनिया दीवानी है और इस कारण ही उन्हें पिछले दशक का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज भी चुना गया। वैसे दोनों टीमों की बल्लेबाजी में गहराई है। लेकिन भारत के पास ऋषभ पंत के रूप में एक्स फेक्टर है, जिसकी न्यूजीलैंड में कमी दिखती है।

सदी में सौ टेस्ट जीत
विराट कोहली अगर यह टेस्ट जीतकर भारत को टेस्ट क्रिकेट का पहला विश्व चैंपियन बना ले जाते हैं तो उनका नाम आईसीसी ट्रॉफी जिताने वाले कपिलदेव और महेंद्र सिंह धोनी के साथ शुमार हो जाएगा। यही नहीं भारत नई सदी यानी जनवरी 2001 से लेकर अब तक 100 टेस्ट जीतने वाले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की जमात में शामिल हो जाएगा। इस सदी में अब तक ऑस्ट्रेलिया ने 130 और इंग्लैंड ने 115 टेस्ट जीते हैं। वहीं भारत के नाम अभी 99 जीतें दर्ज हैं। डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं

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