मुस्लिम महिलाओं को बाकी महिलाओं जैसे अधिकार देने की है मांग

by sadmin
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नई दिल्ली । तलाक ए हसन पीड़िता बेनज़ीर हिना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। बेनज़ीर हिना के वकील अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि उन्हें तलाक के 2 नोटिस मिल चुके हैं। 19 जून को तीसरा नोटिस मिलने पर हलाला का ही विकल्प रह जाएगा। इस पर जस्टिस ए एस बोपन्ना और विक्रम नाथ की अवकाशकालीन बेंच ने कल सुनवाई की बात कही। मुस्लिम पुरुषों को तलाक का एकतरफा अधिकार देने वाले तलाक-ए-हसन और दूसरे प्रावधानों को चुनौती देने वाली यह याचिका 2 मई को दाखिल हुई थी।  पति से तलाक का पहला नोटिस पा चुकी बेनजीर हिना ने कोर्ट से इस प्रक्रिया को रोकने का अनुरोध किया। साथ ही, यह मांग भी रखी कि मुस्लिम लड़कियों को तलाक के मामले में बाकी लड़कियों जैसे अधिकार मिलने चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील के कई बार प्रयास के बावजूद अब तक यह मामला सुनवाई के लिए नहीं लग पाया था। अब अवकाशकालीन बेंच ने सुनवाई की बात कही है। 22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ 3 तलाक बोल कर शादी रद्द करने को असंवैधानिक करार दिया था। तलाक-ए-बिद्दत कही जाने वाली इस व्यवस्था को लेकर अधिकतर मुस्लिम उलेमाओं का भी मानना था कि यह कुरान के मुताबिक नहीं है। कोर्ट के फैसले के बाद सरकार एक साथ 3 तलाक बोलने को अपराध घोषित करने वाला कानून भी बना चुकी है। लेकिन तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन जैसी व्यवस्थाएं अब भी बरकरार हैं। इनके तहत पति 1-1 महीने के अंतर पर 3 बार लिखित या मौखिक रूप से तलाक बोल कर शादी रद्द कर सकता है। वकील अश्विनी उपाध्याय के ज़रिए दाखिल याचिका में बेनज़ीर ने बताया है कि उनकी 2020 में दिल्ली के रहने वाले यूसुफ नक़ी से शादी हुई। उनका 7 महीने का बच्चा भी है। पिछले साल दिसंबर में पति ने एक घरेलू विवाद के बाद उन्हें घर से बाहर कर दिया। पिछले 5 महीने से उनसे कोई संपर्क नहीं रखा। अब अचानक अपने वकील के ज़रिए डाक से एक चिट्ठी भेज दी है। इसमें कहा है कि वह तलाक-ए-हसन के तहत पहला तलाक दे रहे हैं।

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