परिवर्तनकारी नेतृत्व विकसित करने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

by sadmin
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भिलाई। सेल, भिलाई इस्पात संयंत्र के बीएमडीसी में ‘‘परिवर्तनकारी नेतृत्व का विकास’’ पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) ए के भट्टा ने विगत दिनों उद्घाटन किया। इस मानव संसाधन गतिविधि के संकाय डॉ एस एन सिंह, सेल के पूर्वकार्यपालक निदेशक (कार्मिक एंवं प्रशासन), बोकारो स्टील लिमिटेड और भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व महाप्रबंधक (मानव संसाधन विकास) थे। कार्यक्रम के प्रतिभागियों के रूप में भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य महाप्रंधकगण और विभागाध्यक्ष शामिल थे।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि भट्टा ने कहा कि आर्सेलर मित्तल जैसे लगभग सभी बड़े वैश्विक खिलाड़ियों ने भारत में मजबूती से कदम रखा है और हमारे प्रतिस्पर्धियों का बहुत तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में घरेलू इस्पात उद्योग महत्वपूर्ण बदलाव के कगार पर है और इस्पात उद्योग में बहुत अधिक समेकन हो रहा है। सेल को बड़ी लीग में जाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील होना होगा। सीखने की गति को जारी रखने के लिए हमें चपलता और अनुकूलन क्षमता की आवश्यकता है। व्यावसायिक चुनौतियाँ, विशेष रूप से व्यवधान और बिना विलंब किए निर्णय लेने की माँग करते हैं। उन्होंने कहा कि भिलाई में कुछ मोडेक्स इकाइयों को बहुत अच्छी तरह से चालू किया गया था। इन इकाइयों के नेतृत्व के लिए चुनौती लेवल 2 स्तर के स्वचालन जैसी स्थापित आधुनिक प्रणालियों का अधिकतम लाभ उठाना है। रेल और स्ट्रक्चरल मिल जैसी मौजूदा स्थापित इकाइयों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, भट्टा ने मिल के उत्पाद मिश्रण को अनुकूलित करने के लिए कुछ विकल्पों के बारे में बताया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए इस मानव संसाधन कार्यक्रम के संकाय, डॉ एस एन सिंह ने कहा कि उनके द्वारा कवर किए जा रहे विषय स्व-शिक्षा और खोज के नए प्रतिमान खोलेंगे जो प्रतिभागियों को अपनी नेतृत्व भूमिकाओं को पूर्णता के साथ निर्वहन करने में मदद करेंगे। विभिन्न प्रबंधन विशेषज्ञों के विचारों के अनुसार, परिवर्तनकारी नेतृत्वकर्ताओं को कर्मचारियों की जरूरतों पर ध्यान देने और कर्मचारियों की संतुष्टि के लिए बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करने के लिए जाना जाता है। डॉ सिंह ने कहा कि परिवर्तनकारी नेताओं का कर्मचारियों को कार्य करने की संतुष्टि और संगठनात्मक प्रतिबद्धता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सेल के सभी संयंत्रों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ वरिष्ठ प्रबंधन स्तर के अधिकारियों के लिए उनके द्वारा किए गए नेतृत्व सशक्तिकरण व्यवहार पर एक अध्ययन के परिणाम का भी उल्लेख किया।

इससे पहले मुख्य अतिथि और विशेषज्ञ संकाय और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए महाप्रबंधक (मानव संसाधन विकास) सौरभ सिन्हा ने बताया कि सेल में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर परिवर्तनकारी नेतृत्व व्यवहार की पहचान सेल बोर्ड द्वारा की गई है जिस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। अध्यक्ष, सेल ने नेतृत्व के विकास और भविष्य के लिए प्रभावी उत्तराधिकार योजना के माध्यम से सेल को नई लीग में ले जाने के लिए नेतृत्व विकसित करने का कार्य मानव संसाधन को सौंपा है।

उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन विकास) संजीव श्रीवास्तव ने इस दो दिवसीय मानव संसाधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के संकाय, डॉ सिंह की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बोकारो में कार्यपालक निदेशक (कार्मिक एंवं प्रशासन) के रूप में स्थानांतरित करने से पहले भिलाई संयंत्र के विभिन्न विभागों में 37 वर्षों तक विभिन्न पदों पर सेवा कर चुके है। डॉ. सिंह ने भिलाई इस्पात संयंत्र के संदर्भ में सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात इकाई में कर्मचारी प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले नेतृत्व की भूमिका पर शोध कार्य किया है जिसके लिए उन्हें पीएचडी से सम्मानित किया गया था।

दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान शामिल विषयों में अंदरूनी दृष्टिकोण, आत्म जागरूकता, आत्म-प्रेरणा, आत्म-प्रबंधन, स्व-नेतृत्व, सक्रियताय मॉडलिंग, प्रभाव पैदा करना, विश्वास बनाना (चरित्र और क्षमता), पूर्ण रेंज नेतृत्व और परिवर्तनकारी नेतृत्व, परिवर्तनकारी नेतृत्व का महत्व और लेन-देन, नेतृत्व और सशक्तिकरण और सशक्तिकरण के लिए उपकरणों के साथ तुलना पर भी चर्चा की गई।

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