रायपुर। त्योहार का सीजन आते ही शहर से ज्यादा आउटर के घर, सराफा दुकान, बैंक आदि चोर-लुटेरों के टारगेट में रहते हैं. इन इलाकों में पुलिस का मूवमेंट भी अपेक्षाकृत कम रहता है.
इस कारण चोरी-लूट का खतरा बढ़ जाता है. राजधानी का एक बड़ा हिस्सा आउटर का है. इन इलाकों में सर्विस क्लास के साथ ही कारोबारी परिवार भी है. छुट्टियां होने के कारण सर्विस क्लास अपने स्थानीय घरों में ताला लगाकर बाहर चले जाते हैं. इस कारण चोर भी ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं. इसके अलावा बाहरी चोर-लुटेरों के गिरोह भी सक्रिय हो जाते हैं. मंदिरहसौद, खरोरा, माना, विधानसभा, आरंग, राखी, अभनपुर, धरसींवा, मुजगहन थाना क्षेत्रों का बड़ा इलाका आउटर का है.
पेट्रोलिंग-गश्त में दिक्कत
अर्धशहरी और ग्रामीण इलाका होने के कारण आबादी थोड़ा दूर-दूर में है. इस कारण पेट्रोलिंग-गश्त में दिक्कत होती है. कई इलाकों में पेट्रोलिंग-गश्त की टीम पहुंच भी नहीं पाती. इस कारण प्रोफेशनल चोर-लुटेरों का गिरोह ऐसे इलाकों में सक्रिय हो जाता है. मध्यप्रदेश का पत्थर गिरोह ऐसे ही इलाकों को ज्यादा टारगेट करता था।
वारदात से पहले रेकी
दूसरे राज्यों के प्रोफेशनल चोर गिरोह बैंकों और सराफा दुकानों को ज्यादा टारगेट करते हैं. इसके अलावा बड़े मकानों पर नजर रखते हैं. घटना से पहले रेकी कर लेते हैं. इसके बाद वारदात को अंजाम देते हैं. कवर्ड कैंपस वाली कॉलोनियों में भी चोरी को अंजाम देते हैं. अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बाहरी चोर गिरोह कई वारदातें कर चुका है, लेकिन उसका खुलासा नहीं हो पाया है.
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