“आदिशक्ति स्वरूपा बनकर जीवन ज्योत जगाते हैं राह कठिन हो या पथरीली उनमें भी फूल खिलते हैं”

by shorgul
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“आदिशक्ति स्वरूपा बनकर जीवन ज्योत जगाते हैं
राह कठिन हो या पथरीली उनमें भी फूल खिलते हैं”

भिलाई। यह पंक्तियां है नारी सशक्तिकरण के गीत”स्वयंसिद्धा एंथम’ की। इस गीत का विमोचन
डॉ.मोक्षदा (ममता)चंद्राकर जी, कुलपति,इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कर कमलों से किया गया ।
स्वयंसिद्धा-ए मिशन विद ए विजन छत्तीसगढ़ की अग्रणी महिला संस्था है जो विवाहित महिलाओं की प्रतिभा को मंच व सम्मान प्रदान करती है।
संस्था की डायरेक्टर
डाॅ.सोनाली चक्रवर्ती द्वारा लिखित व निर्देशित इस गीत को गाया है सोनाली चक्रवर्ती एवं गौतमी चक्रवर्ती ने। गीत का संगीत निर्देशन किया है वि.के. सुंदरेष ने, वीडियो के डीओपी शेखर घोष व नृत्य संयोजन इज़ा नेल्सन पाल का है।
इसके वीडियो में 200 से अधिक गृहणियों ने अभिनय किया जिसमें स्वयंसिद्धा समूह की 60 सदस्याएं, महाराष्ट्र मंडल सेक्टर 4 की सदस्यांए, भिलाई इस्पात संयंत्र की महिला अधिकारी कर्मचारी, फाउंडेशन प्ले स्कूल की शिक्षिकाएं व पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
डाॅ.ममता चंद्राकर जी का कहना है कि इस गीत पर बहुत मेहनत की गई है यह निश्चित रूप से महिला सशक्तिकरण के लिए मिल का पत्थर साबित होगी।
आज सिविक सेंटर में आयोजित एक्सप्रेस वार्ता में डॉ.सोनाली ने बताया कि हम महिला सशक्तिकरण के इस गीत को पूरे देश की महिलाओं को समर्पित करना चाहते थे इसीलिए इसे नवरात्रि में रिलीज किया।

“आधी दुनिया नहीं है हम
हम हैं दुनिया पूरी
धरती का विश्वास भरा
हम इस संसार की धुरी”

ऐसे प्रभावी पंक्तियों से सुसज्जित यह गीत महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाएगी। प्रेस वार्ता में स्वयंसिद्धा की संरक्षक डॉ.पूर्णिमा लाल, नीलिमा शुक्ला आदि मौजूद थे।

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