रायपुर। राजधानी के गुढ़ियारी पड़ाव में चल रहे चंपेश्वर शिव महापुराण में पं. प्रदीप मिश्रा का प्रवचन सुनने के लिए छतीसगढ़ सहित देशभर से उनके फैंस की भीड़ उमड़ रही है। हर दिन आंकड़ा बदल रहा है। पहले दिन 4 से 5 लाख फैंस की भीड़ जुटी और अब यह आंकड़ा 5 लाख को भी पार कर गया है। यही वजह है कि आयोजन स्थल के पंडाल में श्रद्धालु श्रोता, युवा फैंस रात्रि विश्राम कर रहे हैं ताकि पं. मिश्रा का प्रवचन आसानी से सुनकर दर्शन लाभ लिया जा सके। वहीं कथा वाचक पंडित मिश्रा श्रोताओं से बार-बार आग्रह कर रहे है कि अब पंडाल में जगह नहीं है। इसलिए आने की जरूरत नहीं है। घर में बैठ कर आस्था चैनल में कथा का श्रवन करें। फिर भी फैंस बढ़ रहे हैं। फैंस की दीवानगी सामने थी जो भोजन के बाद सोने की तैयारी कर चुके थे और पंडाल में पैर लंबा कर आपस में बात कर रहे थे। यहां पर हमने पंडित के कई प्रशंसकों में से कुछ से बातचीत की, इसमें किसी ने पंडित को लाइलाज बीमारी का उपचार बताने वाला डॉक्टर बताया, तो किसी ने भगवान शिव के प्रमुख उपासकों में गिनती की।
सालों इलाज कराया, पर बेल की पत्ती से पैर को राहत मिली
बिलासपुर से पंहुचे शिवकुमार श्रीवास ने कहा कि उनका सेलून है जिससे रोजगार चलता है। वे पत्नी शिवकुमारी के साथ प्रवचन सुनने के लिए पहुंचे हैं, वे यहां रात पंडाल में गुजारेंगे। सुबह प्रवचन सुनने के बाद वापस बिलासपुर लौटेंगे। उन्होंने बताया कि पत्नी को पैर में दर्द रहता था कई चिकित्सकों को दिखाया पर लाभ नहीं मिला लेकिन पंडित के बेलपत्र व एक लोटा जल विधि ने काम कर दिया।
मन को बड़ी शांति मिलती है
राजनांदगांव से आई 60 वर्ष की रमौतिन का कहना था वह सालेकसा के प्रवचन में शामिल हुई थी वहां प्रवचन अच्छा लगा था। भगवान की महिमा को अच्छे से व्याख्या कर बतलाते हैं जो अच्छा लगता है। वे बताती हैं कि घर में पति और बच्चे हैं जिनकी अनुमति मिलने के बाद प्रवचन सुनने आई हैं। यहां मन को बड़ी शांति मिलती है।
ऐसे आयोजन इलाके को एक पहचान मिल रही
व्यापारी अजय शर्मा का कहना है कि पिछले कई साल से यहां पर वे चायपत्ती और किराना का काम करते आ रहे हैं। इस आयोजन से इलाके को एक पहचान मिल रही है। यह क्षेत्र धीरे-धीरे धर्मनगरी के रूप में स्थापित होते जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज जितनी भी भीड़ आ रही है उससे कोई विशेष परेशानी नहीं है। बल्कि भीड़ को सहयोग के साथ रास्ता बताते हैं ताकि व्यवस्था को लेकर कोई परेशान न हों। उन्होंने बताया कि यहां पर आने वाले दिनों में और भी आयोजन होने वाले हैं।

..तब मन भीड़ को देखने में लग जाता है
क्षेत्र के एक अन्य व्यापारी राकेश हिंदुजा का कहना था कि भीड़ से थोड़ी परेशानी अवश्य होती है। लेकिन न तो आयोजन से व्यापार में फर्क पड़ा है और ना ही आनेवाली भीड़ से किसी तरह की कोई परेशानी हुई है। वे बताते हैं कि ऐसे आयोजन से लाभ ही हुआ है। दंपति देवेश बरोठिया ने बताया कि भीड़ जब निकलती है तब मन भीड़ को देखने में लग जाता है। मानों ऐसा लगता है कि भीड़ को देखते ही रहें, थोड़ी शोर-गुल होती है पर भगवान की आराधना के लिए इतना तो अवश्य भुगतान करना पडे़गा।
