मुख्यमंत्री और मंत्रीगण बस से पहुंचे माता कौशल्या के दरबार में

by sadmin
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रायपुर : मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल और उनके मंत्रीमंडल के सहयोगी, सांसद और विधायकगण आज शारदीय नवरात्रि के पहले दिन माता कौशल्या के दर्शन एवं पूजा अर्चना के लिए बस से चंदखुरी मंदिर पहुंचे। इस अवसर पर सभी ने विधिविधान से पूजा-अर्चना की और माता कौशल्या के दर्शन कर राज्य की जनता की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और उनके मंत्री मण्डल के सहयोगी माता कौशल्या के मंदिर के जीर्णाेंद्धार एवं परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य के शिलान्यास के अवसर पर भी बस से ही माता कौशल्या के दरबार में पहुंचे थे। चंदखुरी में माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर तालाब के बीचों-बीच स्थित है। इस मंदिर की पूरे अंचल में बड़ी मान्यता है। नवरात्रि के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा माता कौशल्या मंदिर परिसर का विकास एवं सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। कौशल्या माता का यह मंदिर राम वन गमन पर्यटन परिपथ में शामिल है। भगवान श्री राम के वन गमन की स्मृतियों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 135 करोड़ 55 लाख रूपए की लागत से राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकसित किया जा रहा है। यह पर्यटन परिपथ भगवान श्री राम के वनवास के दौरान छत्तीसगढ़ में उनके प्रवेश स्थल कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका से लेकर सुकमा के रामाराम तक का कुल 2260 किलोमीटर का है। इसी राम वन गमन पर्यटन परिपथ में रायपुर के आरंग विकासखण्ड स्थित माता कौशल्या मंदिर का भी शामिल है। जिसका जीर्णाेंद्धार एवं विकास के प्रथम चरण का कार्य पूरा हो गया है। जिसका लोकार्पण नवरात्रि की प्रथमा को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने किया। इससे पूर्व उन्होंने शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ जिसे दक्षिण कौसल कहा जाता है, यह पवित्र भूमि माता कौशल्या का मायका और भगवान श्री राम का ननिहाल है। भगवान श्री राम छत्तीसगढ़ के जन-जन के मन में रचे-बसे हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ के लोग भांचा राम के रूप में मानते और पूजते हैं। भगवान श्री राम का ही यह प्रताप है कि छत्तीसगढ़ में लोग भांचा को भगवान राम के रूप में मानते हैं और उन्हें सम्मान स्वरूप पांव पड़ने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम है।
कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी में भगवान श्री राम के वन गमन के स्मृतियों को बड़े ही आकर्षक ढंग से उकेरा गया है। यहां मंदिर परिसर में भगवान श्री राम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की गई है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा यहां कराए गए विकास एवं सौंदर्यीकरण के कार्याें से पूरा मंदिर परिसर भव्य एवं आकर्षक दिखने लगो है।

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