पत्थलगांव सोसायटी में खाद बीज की भारी कमी, किसान खाद बीज पाने रोज लगा रहे चक्कर

by sadmin
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दक्षिणापथ, पत्थलगांव। किसानों को ऋण के तहत खाद बीज देने वाली सोसायटी आदिम जाति सेवा सहकारी समिति पत्थलगांव में पर्याप्त मात्रा में खाद बीज का भंडारण नही करने के कारण क्षेत्र के किसानों को सोसायटी का चक्कर लगाते लगाते चप्पल घिस जा रहा है, किसानों को ग्राम वाइज खाद देने दिन निर्धारित किया गया है और जब उक्त ग्राम के किसान खाद लेने केन्द्र पहुचते है कभी यूरिया का खाद नही रहता तो कभी डी ए पी नही रहता कभी सुपर खाद नही रहता जिस कारण किसानों को बैरंग लौटना पड़ता है और कभी मिलता भी है तो मात्रा इतना कम रहता है कि दो से तीन दिनों में ही समाप्त हो जाता है जबकि समिति कर्मचारियों ने अनेक किसानों को रकबा अनुसार मिलने वाली खाद की मात्रा में एक एक दो दो बोरी खाद की मात्रा में कटौती कर दी गयी है जिससे भी वे किसान चिंतित है। जबकि कोई किसान भाड़े का वाहन या अपना स्वयं का वाहन लेकर आते हैं जिन्हें दोबारा तिबारा अत्यधिक खर्च का वहन करना पड़ रहा है।

खाद बीज के लिये किसानों को हो रही परेशानी को लेकर समिति पत्थलगांव के जागरूक संचालक मंडल सदस्य व किसान नेता विजय त्रिपाठी से किसानों को हो रही समस्या और खाद बीज की कमी को लेकर चर्चा कर वास्तविकता जानना चाहा जिसपर श्री त्रिपाठी इस समस्या को प्रशासन की घोर लापरवाही बताया और कहा कि सम्बंधित अधिकारी कर्मचारी ऐसी परिस्थिति में दौरा तो करते नही और ना ही पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडारण कराते हैं, यहा तक कि कभी कभी तो इतना लापरवाही करते हैं कि खाद पहुच गया है पर दो तीन दिनों तक उसका डिस्पेच नम्बर नही देते जिसके कारण कम्प्यूटर एंट्री नही लेता और किसानों को वापस जाना पड़ता है जबकि यह दायित्व जिला विपड़न अधिकारी का है कि वे जिले के सभी समितियों की स्थिति से वाकिफ हो समय पर वितरण केंद्रों तक खाद वितरण करना। श्री त्रिपाठी ने यह भी कहा कि किसानों की समस्या को देखते हुवे वे क्षेत्रीय विधायक जी से भी चर्चा कर वस्तु स्थिति से उन्हे अवगत कराते हुए किसानों की समस्या दूर कराने आग्रह करेंगे।
प्रमुख भंडारण केन्द्र द्वारा भीगा हुवा यूरिया को भी भेजा जा रहा है जिसे कल पत्थलगांव सोसाइटी में किसानों को भीगा हुआ यूरिया वितरण किया गया जो यूरिया की बारी से पानी निकल रहा था, किसानों का कहना है कि यह एक महीना भी नहीं टिक पायेगा और गल कर पानी बन जायेगा जो किसानों का सीधा सीधा नुकसान है ।

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