रायपुर, जनजागरुकता। रेरा प्राधिकरण उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द राहत दिला रहा है। शिकायत के बाद जल्द पहल के लिए लोग प्राधिकरण की सराहना करते नहीं थकते। एक और मामला रेरा के सामने आया और मामले की सुनवाई करते हुए इस पर भी बड़ी राहत दी है। रेरा का डंडा अब हाउसिंग बोर्ड पर चला है। एक प्रकरण में फैसला सुनाया कि हाउसिंग बोर्ड दो माह के भीतर उपभोक्ता को फ्लैट देगा अन्यथा 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज समेत राशि देनी होगी।
शिकायत के बाद रेरा ने जांच में उपभोक्ता की शिकायत को सही पाया। इसके बाद रेरा अध्यक्ष विवेक ढांड और सदस्य राजीव कुमार टम्टा ने फैसला सुनाया। जानकारी के अनुसार धमतरी निवासी संगीता पाठक ने रेरा में शिकायत की थी कि उसे छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के नवा रायपुर सेक्टर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एलआइजी फ्लैट 25 जून 2016 को आवंटित किया गया था। उसने आठ लाख 50 हजार रुपये का भुगतान एक फरवरी 2018 तक कर दिया। इसके बाद भी उसे फ्लैट नहीं मिला।
रेरा का कहना है कि उसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द राहत दिलाना है। चाहे निजी बिल्डर हों या शासकीय एजेंसियां, सभी पर रेरा फैसला सुनाती है। रेरा प्राधिकरण द्वारा अब तक 1600 से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। रेरा के नियमों के अनुसार उपभोक्ता की अनुमति के बगैर ब्रोशर में भी किसी भी प्रकार से बदलाव नहीं किया जा सकता। बिल्डर को समय पर मकान देना होगा। वह उपभोक्ता को लुभावने आफर देकर ठग नहीं सकता। प्रोजेक्ट में सारी सुविधाएं देनी होंंगी। रेरा द्वारा बैंकों से कह दिया गया है कि वह रेरा में पंजीकृत प्रोजेक्टों के ही लोन स्वीकृत करें। उपभोक्ता भी रेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट की खरीदारी करें।
