देवप्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है और इस बार यह एकादशी 4 नवंबर को है और इसी दिन सायंकाल में तुलसी और शालिग्रामजी का विवाह करवाया जाएगा। एकादशी तिथि 3 नवंबर से आरंभ होकर 4 नवंबर तक रहेगी। इसलिए तुलसी विवाह 3 नवंबर को करवाया जाएगा। मान्यता है कि जो व्यक्ति तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है उसे कन्यादान के बराबर पुण्य फल मिलता है। इसके साथ अगर विवाहित लोग भी तुलसी विवाह करवाते हैं तो उनके भी दांपत्य जीवन से हर प्रकार की समस्या दूर होती है।
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 3 नवंबर में शाम 7 बजकर 35 मिनट से प्रारंभ होगी, जो दूसरे दिन यानी 4 नवंबर में शाम 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। फिर 5 नवंबर में द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी और इसी दिन एकादशी के व्रत का पारण किया जाएगा।
अपने घर में ऐसे करें तुलसी विवाह का आयोजन
- एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान विष्णु की आराधना करें।
- केले के पेड़ की पूजा करें और फिर भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने धूप और दीप जलाएं। फल, फूल और भोग अर्पित करें। इसके साथ ही भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी जरूर चढ़ाएं।
