गो-मूत्र खरीदी से पशुपालकों को मिल रहा दोहरा लाभ

by sadmin
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छग सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना में शुरुआती दौर में गोबर खरीदी कर वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट का निर्माण किया जा रहा था लेकिन अब इसमें विस्तार करते हुए हरेली पर्व पर 28 जुलाई  से  गौठानो में गोमूत्र की खरीदी का शुभारंभ किया गया है।

 पशुपालक ग्रामीणों से अब शासन प्रशासन द्वारा दो रुपए प्रति किलोग्राम की दर गोबर खरीदने के बाद अब चार रुपए लीटर में गोमूत्र खरीद रहा है। गोमूत्र खरीदी से अब पशुपालकों को दोहरा लाभ मिल रहा है। जहाँ गोबर के साथ गौमूत्र की बिक्री कर अच्छी लाभ भी अर्जित कर रहे है। ऐसे ही दंतेवाड़ा जिले में प्रथम चरण  में टेकनार एवं भैरमबन्द गौठान में गौमूत्र की खरीदी की जा रही है। इन दोनों गौठानो के अंतर्गत गौमूत्र की खरीदी कर कीटनाशक, वृध्दिवर्धक का निर्माण किया जा रहा है। जिसमे कीटनियंत्रक 50 रूपये. वृध्दिवर्धक – 40 रूपये का विक्रय दर निर्धारित किया गया है। ग्राम टेकनार गोठान में दिशा ग्राम संगठन कि महिलाओं के द्वारा एवं ग्राम भैरमबंद गौठान में कमलफल स्व सहायता समूह, अम्बे माँ स्व सहायता समूह एवं रोशनी स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा गोमूत्र की खरीदी कर उनसे कीटनाशक, वृध्दिवर्धक बनाया जा रहा है।

वर्तमान में दोनों  गोठानों में कार्यरत समूह की महिलाओं द्वारा 1731 लीटर गौमूत्र की खरीदी की गई जिसमें 625 लीटर कीटनाशक एवं 3820 लीटर वृध्दिवर्धक का उत्पादन किया गया। निर्मित कीटनाशक ब्रह्मास्त्र एवं वृध्दिवर्धक जीवामृत के विक्री उपरांत समूह की दीदियों द्वारा कुल 1 लाख80 हज़ार 108 रुपए अर्जित किया गया। वर्तमान में जिले के कृषकों द्वारा जैविक खेती की जा रही है और अब फसलों में कीटनियंत्रक ,वृद्धिवर्धक जैसे जैविक कीटनाशक का उपयोग किया जा रहा है। जिससे फसल की कम लागत होने से आय में वृद्धि होगी। साथ खाद्यान्न की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और यह पर्यावरण सुरक्षा में भी लाभदायी है। जिले में गौमूत्र से बनाये गए  उत्पाद जिले के सी मार्ट में उपलब्ध है इसके साथ ही किसानों से सीधे संपर्क कर इसकी उपयोगिता के महत्व को समझाते हुए बिक्री की जा रही है।

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