गुलाब नबी बोले-मैं उनके खिलाफ प्रचार करने आया था

by sadmin
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नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने विधानसभा में हुए सेमिनार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत से जुड़े खुलासे किए। आजाद ने कहा कि राजनीति में कटुता के लिए जगह नहीं होनी चाहिए, मेरे सबसे बेहतर संबंध रहे हैं। एक बार मैं पूर्व सीएम भैरोसिंह शेखावत के खिलाफ प्रचार करने उनके निर्वाचन क्षेत्र में जा रहा था। एयरपोर्ट पर ही शेखावत साहब मिल गए, उन्होंने मुझसे कहा कि उनका एक वर्कर निर्वाचन क्षेत्र में मिलेगा, वह आपके लिए गोश्त लेकर आएगा। तुम कश्मीरी हो, गोश्त खाने वाले हो। मैं शेखावत साहब के खिलाफ प्रचार करने आया था और उन्होंने मेरे लिए गोश्त ​भिजवाया। यह संबंधों की प्रगाढ़ता होती है।

आजाद ने कहा, ‘मैं भैरोसिंह शेखावत के चुनाव क्षेत्र में गया। सभा की और उनके राज के खिलाफ बोला, लेकिन राजनीति के कारण हमने कभी व्यक्तिगत संबंधों में कटुता नहीं आने दी। चुनाव में मैंने कभी विपक्ष के उम्मीदवार का नाम नहीं पूछा क्योंकि मुझे उसके खिलाफ नहीं बोलना था, मैं उसके खिलाफ क्यों बोलूं, हमें अपने कामों पर बोलना है।’

विधायक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की बुनियादी सुविधाओं के लिए सिफारिश करनी होती है। विकसित देशों में पानी, बिजली, सड़क तबादले के लिए लोग सांसद-विधायकों के पास नहीं जाते।

सिफारिश करवाने वाले सत्ता और विपक्ष नहीं देखते
आजाद ने कहा- हमारे यहां लोग सत्ता और विपक्ष नहीं देखते, सिफारिश करवाने आते ही रहते हैं। आप अगर किसी विभाग के मंत्री रह गए तो उससे आपका पीछा मरने के बाद ही छूटेगा। जब तक आप जीएंगे लोग उस विभाग से जुड़ी सिफारिश करवाने आएंगे। अगर कोई नेता किसी विभाग का मंत्री रह गया तो लोग उसके विपक्ष में होने के बाद भी सिफारिश करवाने आते हैं। अफसर चाहे हमें भूल गया हो, लेकिन लोग नहीं भूलने देते। कोविड के वक्त मेरे पास देश भर से अस्पतालों के लिए फोन आए, क्योंकि मैं स्वास्थ्य मंत्री रह चुका था।

राजनीति में हमारी प्राइवेसी नहीं रहती
आजाद ने कहा- राजनीति में खासकर विधायक- सांसदों की हमारी प्राइवेसी रहती ही नहीं है, जबकि कार्यपालिका और न्यायपालिका में यह दिक्कत नहीं है। हम परिवार को वक्त नहीं दे पाते। मैं एक बार मेरे बच्चों के स्कूल गया तो बेटे के दोस्तों ने कहा कि तेरे पापा जैसे लगते हैं, जबकि मैं खुद था। यह इसलिए क्योंकि हम बच्चों और परिवार को समय दे ही नहीं पाते। जब हम 70 साल के आसपास हो जाते हैं, तब इसका अहसास होता है।

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