कविता: ओस की बूंद : इंदु तोमर

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साहित्य, संस्कृति समाज सेवा और वकालत के अपने पेशे में एक उचित सामंजस्य बनाते हुए राजस्थान अजमेर की युवा कवियत्री इंदु तोमर जी का अपना एक यूट्यूब चैनल भी है जिसमें वह बहुत सक्रिय रहती है. विभिन्न माध्यमों से अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के लिए वह कविता को एक बेहतर माध्यम मानती हैं. अनेक समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ-साथ आप साहित्यिक मंच पर कुशल संचालन और कविता पाठ भी करती रहती हैं. बहुत शीघ्र ही आपका एक काव्य संग्रह सभी साहित्य प्रेमियों के सामने आ रहा है, इसका प्रकाशन लगभग पूर्णता की ओर है.
वसुंधरा कवच ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल के साहित्य-संस्कृति स्तंभ मैं आपका हार्दिक स्वागत है और प्रस्तुत है उनकी एक कविता..

कविता: ओस की बूंद : इंदु तोमर

इस भोर में
ओस की बूंदे
टपकी उन आंखों से
कोमल कपोल कुंठित मन को
छू गई बस इन सांसों से।

कठिन किताब में कहने की
क्या कोशिश कर डाली उसने
और सूर्योदय जब होने को है
तो खामोशी में..
नज़र फेर डाली उसनेे।।

लफ्ज़ों की, जमी वो गहरी झील
यूँ पट पट पट पट, बोलने लगी है।
ज्यूँ अँधेरा, कभी था ही नहीं
जीवन में सभी के रस घोलने लगी है।।

निकट जाकर देखो
छूकर देखो उसको
कुछ बीनते बीनतेे उस कोहरे में,
एक लकीर बनती नजर आयेगी।

वर्णमाला के जैसे
जोड़कर देखो,
इक अद्भुत शैली ही
तुम्हारी कलम से,
नया जन्म ले पायेगी।

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