कांकेर। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान 5 दिसंबर को होने वाला है लेकिन कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी चयन को लेकर गंभीर चिंतन कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी जहां भानुप्रतापपुर विधानसभा चुनाव के लिए मंथन कर चुकी है, अब उसे सिर्फ निर्णय लेना है कि प्रत्याशी कौन होगा। वैसे कांग्रेस की और से सावित्री मंडावी को ही तय माना जा रहा है, जबकि भाजपा असमंजस में है।
भाजपा के 4 पर्यवेक्षक 9 नवंबर को भानुप्रतापपुर में संभावित प्रत्याशियों के लेकर अर्धरात्रि तक बैठक करते रहे। बैठक में मौजूद पर्यवेक्षक रामविचार नेताम, शिवरतन शर्मा, संतोष पांडे, रंजना साहू ने संभावित प्रत्याशियों से कहा कि अपने समर्थकों को लेकर वे पर्यवेक्षकों के सामने अपनी दावेदारी ताकत के साथ रखें। उपरोक्त सभी पर्यवेक्षकों ने सभी की बात सुनी, उसके बाद कुछ प्रमुख नेताओं से बंद कमरे में अलग-अलग चर्चा भी की। भाजपा के प्रमुख दावेदारों में पूर्व विधायक ब्रह्मा नेताम के साथ ही परमानंद तेता के साथ कुछ अन्य नाम भी सामने आए हैं।
संभावित प्रत्याशी पर लौह अयस्क खदानों के गैंग की भी नजर
दरअसल भानुप्रतापपुर और अंतागढ़ इन दोनों तहसीलों में माइंस की लीज है और इसमें ट्रांसपोर्टिंग करने वाले प्रभावशाली गैंग के लोगों की भी नजर कांग्रेस और भाजपा के संभावित प्रत्याशियों पर लगी है। सूत्र यह बता रहे हैं और यह चर्चा भी गर्म है कि यह गैंग भी चाहता है कि उसके अनुकूल व्यक्ति ही भानुप्रतापपुर का विधायक बने। लगभग कांग्रेस और भाजपा के निर्वाचित 90% लोगों के वाहन प्रभावशाली माइंस ट्रांसपोर्टिंग गैंग के साथ मिलकर अपने ट्रक चला रहे हैं।
जातिगत समीकरण ऐसे हैं भानुप्रतापपुर में
भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख रूप से चारामा तहसील में सबसे ज्यादा मतदाता साहू समाज और कलार समाज के हैं। कोरर सबसे बड़ा गांव है, जहां 70% आदिवासी और 30% गैर आदिवासी हैं। भानुप्रतापपुर तहसील में शहरी क्षेत्र में गैर आदिवासी मतदाताओं और ग्रामीण क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं का भी प्रभाव है। दुर्गुकोंदल आदिवासी बहुल क्षेत्र है। इन तीनों क्षेत्रों को मिलाकर भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र बना है।
आदिवासियों के आरक्षण का मुद्दा गर्म
आदिवासियों के आरक्षण का मामला भी यहां गर्म है और इसको लेकर सर्व आदिवासी समाज की बैठक होने जा रही है। समाज ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई में समाज परेशानी में पड़ गया है, उनका 32% का आरक्षण घटकर 20% हो गया है। दोनों पार्टियों को सबक सिखाने के लिए सर्व आदिवासी समाज में एकजुटता के प्रयास जारी हैं। भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में 162 पंचायतें हैं।
बड़ा मुद्दा… खैरागढ़ की तरह भानुप्रतापपुर को जिला बनाने की मांग
इसके साथ ही वर्षों पुरानी मांग भानुप्रतापपुर को जिला बनाने की आज भी जिंदा है। यह क्षेत्र की जनता की भावना है कि जैसे खैरागढ़ विधानसभा चुनाव के समय खैरागढ़ को जिला बनाने की बात कही गई थी और चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की सरकार ने खैरागढ़ को जिला बना ही दिया। ठीक उसी तरह भानुप्रतापपुर विधानसभा के उपचुनाव में भी कांग्रेस भानुप्रतापपुर को जिला बनाने की घोषणा करे। अगर ऐसी स्थिति निर्मित होती है तो इसका राजनीतिक लाभ चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है और चुनाव के बाद भानुप्रतापपुर की जनता को एक नए जिले की सौगात मिल सकती है।
