पंडित प्रदीप मिश्रा का प्रवचन सुनने देशभर से पहुंच रहे हैं श्रद्दालु श्रोता, पंडाल से बाहर बैठे रहते हैं लाखों लोग

by sadmin
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रायपुर। राजधानी के गुढ़ियारी पड़ाव में शिव महापुराण की कथा जारी है। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के प्रवचन का लाभ लेने प्रदेश के कोने-कोने से भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। देशभर से भी श्रद्दालुश्रोता शामिल होने पहुंचे हुए हैं। लाखों की संख्या में लोग सुबह से प्रवचन स्थल पर पहुंच रहे हैं। वे भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूबे हुए हैं। पंडाल पर महामंत्र श्री शिवाय नमस्तुभ्यम की गूंज है।

राजधानी रायपुर में आज दूसरे दिन गुरुवार को शिव महापुराण की कथा में आज भी 3 लाख से अधिक श्रद्धालु श्रोता कथावाचक प्रदीप मिश्रा को सुनने रायपुर पहुंचे हैं। साथ ही दूसरे जिलों और प्रदेशों से ट्रेन के माध्यम से यात्रा कर रायपुर आ रहे यात्रियों का स्वागत भी किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन स्थित हनुमान मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने हेल्प डेस्क की व्यवस्था की है। यह सेवा 5 दिनों तक जारी रहेगी।

इधर कार्यक्रम स्थल तक ले जाने की सुविधा सहित किसी भी तरह की मदद के लिए समिति के पदाधिकारी उपलब्ध हैं। 12 बजे रेलवे स्टेशन सर्वधर्म हनुमान मंदिर के सामने हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया गया है। लाखों की तादात में पहुंचे श्रद्धालु, जिसे जहां जगह मिली वहीं रम जा रहे हैं।

भगवान शिव को प्रसन्न करना है तो त्याग दें छल, कपट और अहंकार 

कथा के दूसरे दिन प्रवचन में पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा अगर हम छल, कपट और अहंकार कर एक लोटा जल भी भगवान शिव को चढ़ाते हैं, तो भगवान उसे स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए जरूरी है कि भगवान को प्रसन्न करने इन चीजों का त्याग करें।

महापुराण कथा में आगे कहा कि इतना ही नहीं यदि हम एकादशी का व्रत करते हैं और किसी को अपशब्द कह दें, तो उससे भी कभी पुण्य लाभ की प्राप्ति नहीं होती। पंडित मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव जी इस पृथ्वी पर वास करते हैं, उनको पहचानने और जानने की जरूरत है। भगवान को प्रसन्न करने किसी दूर-दराज नहीं बल्कि घर के सबसे पास स्थित शिव मंदिर में भी जल चढ़ाने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है।

..पर किसी जरूरतमंद की मदद जरूर करें

उन्होंने आगे कहा कि शिव महापुराण कथा कहती है कि भले ही आप अगरबत्ती न जलाएं, धूप न जलाएं पर किसी जरूरतमंद, गरीब की मदद करने से कभी पीछे न हटें, क्योंकि इनकी मदद से जो पुण्य मिलता है वो कहीं और नहीं मिल सकता।

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